Most Popular Hindi Poem | Heart Touching Poem

Most Popular Hindi Poem | Heart Touching Poem

Most Popular Hindi Poem, Heart Touching Poem, Best Poem in Hindi
आँखे वो तेरी जो मेरे लिए बेहती थी

यादे वो मेरी, जो तेरी ही होती थी

बस बहत हो गयी--------------

अब तो आगे बढ़ना हैं,

फिर से प्यार करना हैं,

शायद गलती होगी फिर से,

पर इस बार भी तुझसे ही प्यार करना हैं,

बस तुझसे ही प्यार करना हैं।
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अगर इश्क़ गुनाह हैं तो सबसे बड़ी सजा,

मुझको मिले

क्योकि यहाँ इश्क़ हमने किया, इज़हार भी हमने

और इंतज़ार भी हमने

वो तो दूर खड़ी अपनी तारीफ सुनती रही

और धोखे से उसे प्यार सोचा भी तो हमने

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वो हमेशा दूर से ही देखती हैं

कभी कभी हां कभी कभी

थोड़ी सी मुस्कुराती हैं

पता नहीं कैसे उसने नज़र से एक

डोर सी बनाके रखी हैं

जब भी ये नज़र मिलती हैं में पीछे की तरफ जाता हूँ

पर दिल उसकी तरफ चलती हैं

-वो भी शायद चुपके से बार बार देखती हैं, एक नहीं

दो नहीं हज़ार बार देखती हैं

क्या ये मुमकिन हैं की ---

जो में सोचता हूँ,

वो सच में वही महसूस करती हैं
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तुझे देखा, तो देखने की आदत हो गयी

तुझे चाहा, तो चाहने की आदत हो गयी

तुझे सोचा, तो सोचने की आदत हो गयी

तुझे मांगगा, तो मांगने की आदत हो गयी

तुझे सताया, तो सताने की आदत हो गयी

-पता नहीं कैसे तू दिखी और चाहत बनी,

और फिर आदत बनी, कैसे उलझ गया में तेरी इन आँखों में

की तू इस दिल की "मुहाब्बत" बन गयी
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उस दिन तुम मुझे देख रही थी

और में भी तुमको देख रहा था

हलकी सी बारिश हुई, पर तुम वही रही

मुझे भी महसूस हो रहा था बारिश,

पर में भी वही रहा

तुम भीगने लगी, और में देख रहा था

नजाने क्यों आज भी हर पल याद हैं

उस दिन जो हुआ था

तुम धीरे धीरे चलती हुई मेरे पास आयी

और तुमने बताया की " तुम भीग रहे हो"

तब तक मेरी आँख तुम्हारी आखो में ही थी

हां, फिर तुमने अपने होंठो को मेरे कानों के पास

लाकर कुछ कहा और तुम चली गयी........

आँखे बस तुमको देखती रही,

सांसे चलती रही

दिल भी ज़ोर-ज़ोर से धड़कती रही

तुम्हारी खुश्बू मेरे दिल को महका रही थी

बारिश में पता भी नहीं चला की आँखों से

आँशु भी आ रही थी

कुछ भी उस दिन तुम बस तुम चारो तरफ

छा रही थी ............................. 

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सिख लिया हमने ------------

तुमसे इश्क़ करना, वो भी तुम्हारे बिना

तुमसे बाते करना, वो भी तुम्हारे बिना

शायद में कही खो गया हूँ, तुम्हारे बिना

लोगो ने मुझ पर पत्थर मारना शुरू कर दिया

अब में क्या करूंगा, तुम्हारे बिना

बहत परेशान हूँ, इन लोगो से

बस तुम आओ और मुझे ले जाओ

क्यों तुम आओगी ना

तुम सच मे आओगी ना

पिछली बार की तरह भूल

तो नहीं जाओगी ना

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ये खुदा ये इश्क़ हैं, या कुछ और

हमने उनको चाहा, पर कभी बता न पाए

हमने खुद से ज्यादा प्यार किया

पर उन्हें महसूस तक नहीं हुआ

हमने हर एक चीज़ को निभाया

पर वादा ना कर सके

उसने पुकारा भी तो किसी और को

और हम उनका दिल ना तोड़ सके


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हॅसी आती हैं खुद पर

-जब अन्जान जगह में भी तेरे होने एहसास होता हैं

हॅसी आती हैं खुद पर

-जब अन्जान फ़ोन तुझे ही सोचकर उठाता हूँ

हॅसी आती हैं खुद पर

-जब खुद से ज्यादा तेरा नाम लिखता हूँ

हां में जनता हूँ

-तु तो किसी और की हैं

अब मान भी जा पगली

-में फिर भी तेरा ही इंतज़ार करता हूँ

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हक़ से कहता हूं तू मेरी है,
जिंदगी तुम बिन अधूरी है....!

खुशियां जो है मेरे इर्द गिर्द,
सब तेरी ही तो मेहरबानी है....!

रोज पुछती हो फ़िर भी तुम,
क्या एहमियत तुझे मेरी है....!

कहता हूं मैं बस इतना ही की,
सांसे जीने के लिए जरूरी है....!

ख्वाहिश नहीं और कुछ भी,
तेरे साथ जीनी ये जिंदगानी है....!

मुझे एतबार नहीं है किस्मत पे,
बस एक तू ही मेरी तकदीर है....!!!

प्रविन.........

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तो अम्बर सी ऊंचाई भी है,
एक ख्वाबों की दुनिया है
तो अत्यधिक सच्चाई भी है
इतिहास समेटू चंद पन्नों पर
तो आज का आइना भी दिखलाऊँ मैं,
रहती हूँ खामोश तो अक्सर
मगर भविष्य भी बन जाऊँ मैं
हर विकास की जड़ भी मैं
तो समस्त शिक्षित की नींव हूँ,
किसी के लिए समस्या बनूँ
तो किसी के लिए समाधान भी हूँ
व्यक्त न हो पाएं जज़्बात जो
उनके लिए वक्ता भी हूँ,
हर पीड़ा की दवा हूँ
तो हर धनवान का स्त्रोत भी हूँ
परम मित्र भी बन जाऊँ मैं
सर्वश्रेष्ठ सलाहकार हूँ,
अकेलेपन की साथी भी हूँ
हाँ, ऐसी मैं एक किताब हूँ 

-आकांक्षा भटनागर
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बात-बात में यूँही कभी पूछा किसी ने, 
कि क्या होती है कीमत, कविता की ज़िंदगी मे, 
अचानक से पूछे इस प्रश्न पर, मैं कुछ उलझा, 
कुछ हँसा, कि नर है ये नादान या निरा मूर्ख है।
शायद नहीं जानता कि कविता ही इसका मूल है,
जब से नर ने जन्म लिया जन्म मरण कई बार हुआ, 
किन्तु रूप मिला तुझे कविता का, सदैव नया होगा।
खुद कविता बनता जा रहा नर, 
पूछता है कीमत कविता की, 
कभी खुद पर भी तो गौर कर, 
क्या कीमत है तेरी माटी की सत्ता की। 
पल पल गुज़र रहा है तू , 
गुज़र जाएगा एक दिन, 
पर कविता फिर भी मिलेगी अनवरत, 
तब हैसियत तेरी कीमत चुकाने की न होगी।
-मयंक गुप्ता
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किताबें पढ़ो आगे बढ़ो
इनमें है ज्ञान आपार
घर-बाहर दिन या रात्रि
ये दोस्त सदाबहार
चाहे दुनिया की सैर करलो
या जासूसी नॉवल पढ़ लो
कभी अपना मनोबल बढ़ा लो
या कोई नया व्यंजन चढ़ा लो
किसी की जीवन गाथा पढ़ लो
या गणित के सवाल जड़ लो
ज्ञान के इस वरदान को
तुम जीवन में सेवन करलो
-अनुष्का सूरी
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